25 फीट चौड़ा पाड़ पड़ने से पकी हुई फसल बर्बाद; ग्रामीणों ने खुद ट्रैक्टर-ट्रालियों से भरा कटाव
डबवाली/डूमवाली (लहू की लौ): बेमौसमी बरसात और फैक्ट्रियों के गंदे पानी के दबाव के कारण ऐतिहासिक लसाड़ा नाला एक बार फिर कहर बनकर टूटा है। पंजाब के अंतिम छोर और हरियाणा की सीमा से सटे गांव डूमवाली में सोमवार देर रात नाला टूटने से करीब 25 फीट चौड़ा पाड़ (कटाव) लग गया, जिससे सवा सौ एकड़ में खड़ी गेहूं की पकी हुई फसल बर्बाद हो गई।
ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा: गांव डूमवाली के सरपंच दीपा के नेतृत्व में 100 से अधिक ग्रामीणों ने दिन-रात मेहनत कर ट्रैक्टर-ट्रालियों की मदद से मिट्टी डालकर इस पाड़ को भरा। इस प्राकृतिक आपदा के कारण किसान भानू प्रताप सिंह, महिपाल सिंह, मनजीत सिंह और जगसीर सिंह की तैयार फसल पानी में डूब गई। सूचना मिलने पर बठिंडा प्रशासन की ओर से पटवारी और विभागीय अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया।
जोगेवाला में टला बड़ा खतरा: हरियाणा के गांव जोगेवाला के ग्रामीण पिछले सात दिनों से नाले पर पहरा दे रहे थे। ग्रामीण सुरजीत सिंह के अनुसार, यदि नाला हरियाणा की तरफ टूटता तो साल 2022 की तरह भारी तबाही मच सकती थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डबवाली के एसडीएम अर्पित संगल और थाना शहर प्रभारी देवीलाल ने भी मौके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
लसाड़ा नाले का इतिहास: 1963 में निर्मित 255 किमी लंबा यह नाला लुधियाना से शुरू होकर राजस्थान सीमा तक जाता है। इसका 200 किमी हिस्सा पंजाब और 55 किमी हरियाणा में आता है। हालांकि 1992 में हरियाणा सरकार ने अपने क्षेत्र में इसे बंद कर जमीन किसानों को लौटा दी थी, लेकिन हर साल ओवरफ्लो होने के कारण यह नाला विवादों और सुर्खियों में रहता है।