सिरसा, 29 मार्च।
हरियाणा के उद्यान विभाग द्वारा किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए “मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना” संचालित की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी उनकी आय प्रभावित न हो।
इस योजना के तहत कुल 46 प्रकार की फसलों को शामिल किया गया है, जिनमें सब्जियां, फल और मसाले प्रमुख हैं। योजना के अनुसार सब्जियों व मसालों के लिए 30 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा फलों के लिए 40 हजार रुपये प्रति एकड़ तक बीमा कवर प्रदान किया जाता है। इसमें किसान को मात्र 2.5 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है, जो कि सब्जियों व मसालों के लिए 750 रुपये प्रति एकड़ और फलों के लिए 1000 रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया गया है।
योजना में मुआवजा राशि फसल के नुकसान के प्रतिशत के आधार पर तय की गई है। यदि नुकसान 0 से 25 प्रतिशत तक होता है तो कोई मुआवजा नहीं मिलता, जबकि 26 से 51 प्रतिशत नुकसान होने पर 50 प्रतिशत मुआवजा दिया जाता है। इसी प्रकार 51 से 75 प्रतिशत नुकसान पर 75 प्रतिशत और 75 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर 100 प्रतिशत मुआवजा किसानों को दिया जाता है। सब्जियों व मसालों के लिए अधिकतम 30 हजार रुपये और फलों के लिए 40 हजार रुपये तक मुआवजा निर्धारित है।
इस योजना के अंतर्गत मुआवजा राशि सीधे पंजीकृत किसानों के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाती है, जो कि सर्वेक्षण के आधार पर तय होती है। योजना में टमाटर, प्याज, आलू, फूलगोभी, मटर, गाजर सहित 23 प्रकार की सब्जियां, आम, अमरूद, संतरा, अंगूर, अनार सहित 21 प्रकार के फल और हल्दी व लहसुन जैसे मसाले शामिल हैं।
इसके अलावा योजना में प्राकृतिक आपदाओं जैसे ओलावृष्टि, तापमान में अत्यधिक परिवर्तन, पाला, बाढ़, जलभराव, नहर या ड्रेन टूटना, आंधी-तूफान और आग जैसी घटनाओं को भी शामिल किया गया है, जिससे किसानों को व्यापक सुरक्षा मिलती है।
किसानों के लिए इस योजना में पंजीकरण की सुविधा “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे आसानी से घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। यह योजना किसानों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो रही है और उन्हें बागवानी खेती के प्रति प्रोत्साहित कर रही है।
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