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Lahoo Ki Lau
02 मई 2026
वाटर टैंक का निर्माण कर अपनाएं सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, 85 प्रतिशत तक मिलेगी सब्सिडी
सिरसा, 01 मई।
जिला के किसानों के लिए ऑन-फार्म वाटर टैंक निर्माण वित्तीय सहायता योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को बढ़ावा देने और पानी के बेहतर उपयोग पर बल दिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य खेती में पानी की बचत व सिंचाई क्षेत्र में विस्तार करते हुए किसानों की आय में वृद्धि करना है। जहां कृषि क्षेत्र में पारंपरिक सिंचाई तरीकों से पानी की खपत अधिक होती है, वहीं वॉटर टैंक निर्माण के साथ माइक्रो इरिगेशन सिस्टम अपना कर पानी की कम खपत के साथ अधिक मुनाफा लिया जा सकता है।
योजना के तहत सामुदायिक और व्यक्तिगत दोनों प्रकार के वाटर टैंक बनाए जा सकेंगे। चार या अधिक किसानों द्वारा बनाए गए टैंक को सामुदायिक टैंक माना जाएगा, जिस पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। वहीं, व्यक्तिगत किसान को टैंक निर्माण पर 70 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा।
इस योजना में यह अनिवार्य किया गया है कि सामुदायिक टैंक से जुड़े कम से कम 75 प्रतिशत क्षेत्र तथा व्यक्तिगत टैंक के मामले में 50 प्रतिशत भूमि पर माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाया जाए। योजना का लाभ केवल भूमि मालिक किसानों को ही मिलेगा।
सरकार ने 2 एकड़ से 50 एकड़ तक के क्षेत्र के लिए टैंक निर्माण पर सहायता निर्धारित की है, जिसमें न्यूनतम 1.05 लाख रुपये से लेकर अधिकतम 8.40 लाख रुपये का व्यक्तिगत टैंक के लिए 70त्न व सामुदायिक टैंक के लिए 85 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगी और प्राथमिकता उन किसानों को दी जाएगी जो अधिक क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन अपनाएंगे।
एमआई काडा के कार्यकारी अभियंता विजय पाल सिंह ने बताया कि योजना के तहत सहायता राशि तीन चरणों में जारी की जाएगी पहले चरण में खुदाई के बाद 20 प्रतिशत, दूसरे चरण में निर्माण पूरा होने पर 40 प्रतिशत और अंतिम 40 प्रतिशत राशि माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाने के बाद दी जाएगी। इस योजना से पानी की बचत होगी, खेती में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
जिला के किसानों के लिए ऑन-फार्म वाटर टैंक निर्माण वित्तीय सहायता योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को बढ़ावा देने और पानी के बेहतर उपयोग पर बल दिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य खेती में पानी की बचत व सिंचाई क्षेत्र में विस्तार करते हुए किसानों की आय में वृद्धि करना है। जहां कृषि क्षेत्र में पारंपरिक सिंचाई तरीकों से पानी की खपत अधिक होती है, वहीं वॉटर टैंक निर्माण के साथ माइक्रो इरिगेशन सिस्टम अपना कर पानी की कम खपत के साथ अधिक मुनाफा लिया जा सकता है।
योजना के तहत सामुदायिक और व्यक्तिगत दोनों प्रकार के वाटर टैंक बनाए जा सकेंगे। चार या अधिक किसानों द्वारा बनाए गए टैंक को सामुदायिक टैंक माना जाएगा, जिस पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। वहीं, व्यक्तिगत किसान को टैंक निर्माण पर 70 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा।
इस योजना में यह अनिवार्य किया गया है कि सामुदायिक टैंक से जुड़े कम से कम 75 प्रतिशत क्षेत्र तथा व्यक्तिगत टैंक के मामले में 50 प्रतिशत भूमि पर माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाया जाए। योजना का लाभ केवल भूमि मालिक किसानों को ही मिलेगा।
सरकार ने 2 एकड़ से 50 एकड़ तक के क्षेत्र के लिए टैंक निर्माण पर सहायता निर्धारित की है, जिसमें न्यूनतम 1.05 लाख रुपये से लेकर अधिकतम 8.40 लाख रुपये का व्यक्तिगत टैंक के लिए 70त्न व सामुदायिक टैंक के लिए 85 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगी और प्राथमिकता उन किसानों को दी जाएगी जो अधिक क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन अपनाएंगे।
एमआई काडा के कार्यकारी अभियंता विजय पाल सिंह ने बताया कि योजना के तहत सहायता राशि तीन चरणों में जारी की जाएगी पहले चरण में खुदाई के बाद 20 प्रतिशत, दूसरे चरण में निर्माण पूरा होने पर 40 प्रतिशत और अंतिम 40 प्रतिशत राशि माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाने के बाद दी जाएगी। इस योजना से पानी की बचत होगी, खेती में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
म्हारी योजना कॉलम के लिए
01 मई 2026
30 अप्रैल 2026
29 अप्रैल 2026
28 अप्रैल 2026
27 अप्रैल 2026
26 अप्रैल 2026
वीटा से जुड़ी दूध समितियों को उपलब्ध कराए जा रहे अत्याधुनिक संसाधन, उत्तम क्वालिटी के चारा बीज से लेकर पशु आहार भी कराए जा रहे उपलब्ध
सिरसा, 26 अप्रैल।
प्रदेश में दूध उत्पादन को सशक्त बनाने और डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से वीटा मिल्क प्लांट द्वारा कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के तहत महिला दूध समितियों सहित अन्य दूध समितियों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
योजना के अंतर्गत दूध की गुणवत्ता जांचने के लिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे डी.पी.एम.सी.यू. उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इससे दूध की शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर उत्पाद मिल सकेगा।
इसके साथ ही, “हरे चारे का बीज देने” की योजना के तहत दूध संघ सिरसा द्वारा हर वर्ष हरे चारेः ज्वार, बरसीम और जई के उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीज समितियों को मांग अनुसार वितरित किए जाते हैं। इस पहल से पशुओं के लिए पोषक आहार की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि की संभावना है।
वहीं “पशु आहार देने” की योजना के अंतर्गत समितियों को कैटल फीड, पशु मेश, कैटल मेश, मिनरल मिक्सचर, गोधारा शक्ति, काल सागर सहित पशुओं की अन्य आवश्यक दवाइयां रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे पशुपालकों का खर्च कम होगा और पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।
वीटा मिल्क प्लांट के सीईओ दिनेश कुमार ने कहा कि
इन योजनाओं से हरियाणा के डेयरी सेक्टर को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा। इस पहल को किसानों द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
25 अप्रैल 2026
दूध उत्पादकों की पढ़ाई में अव्वल बच्चों को मिलेगी 5100 रुपये की छात्रवृत्ति,
सिरसा, 24 अप्रैल।
सहकारी क्षेत्र से जुड़े दूध उत्पादकों के परिवारों के लिए कई योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। वीटा के साथ जुड़े इन परिवारों के लिए यह कदम समाज के कमजोर वर्गों के लिए सहायक सिद्ध होगा और डेयरी क्षेत्र से जुड़े परिवारों को सम्मानजनक सहयोग प्रदान करेगा। दूध उत्पादकों व उत्पादक समिति के सदस्यों के बच्चों के लिए मैट्रिक व 12वीं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने पर क्रमश: 2100 रुपये तथा 5100 रुपये की छात्रवृति योजना लागू की गई है। इस पहल को ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग डेयरी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। इससे दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, दूध उत्पादकों की बेटियों की शादी पर 1100 रुपये की राशि कन्यादान के रूप में प्रदान की जाएगी। ये पहल दुग्ध उत्पादकों के शिक्षा में अव्वल बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इससे उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है।
म्हारी योजना कॉलम के लिए
24 अप्रैल 2026
23 अप्रैल 2026
22 अप्रैल 2026
21 अप्रैल 2026
स्व-गणना में भाग लेकर जनगणना कार्य में सहयोग करें आमजन
सिरसा, 21 अप्रैल।
जिले में जनगणना-2027 के तहत स्व-गणना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला में विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अभियान के अंतर्गत सीएमके महाविद्यालय में छात्राओं को, बीडीपीओ कार्यालय में सरपंचों व ग्राम सचिवों को तथा आरोही स्कूल नाथूसरी चौपटा में विद्यार्थियों को स्व-गणना अभियान में योगदान के लिए प्रेरित किया।
डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर हिमांशु शर्मा ने बताया कि नागरिक https://se.census.gov.in पोर्
सहायक ललित कुमार ने बताया कि जिलावासी 30 अप्रैल तक स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लेकर जनगणना कार्य में सहयोग करें। यह सुविधा पहली बार जनगणना में दी गई है, जिससे नागरिक स्वयं अपने परिवार का विवरण ऑनलाइन भर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह भारत की पहली पूर्णतः: डिजिटल जनगणना होगी, इसमें जनगणना कर्मी मोबाइल ऐप के माध्यम से डाटा संग्रह करेंगे और जानकारी सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपडेट होगी। जो लोग ऑनलाइन सुविधा का उपयोग नहीं कर पाएंगे, उनके लिए पारंपरिक तरीके से घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी। आमजन आधुनिक और सरल प्रक्रिया का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और समय रहते स्व-गणना कर जनगणना 2027 को सफल बनाने में अपना योगदान दें।
पीएम स्वनिधि योजना: रेहड़ी-फड़ी संचालकों के लिए आसान ऋण, सब्सिडी और डिजिटल प्रोत्साहन से आत्मनिर्भर बनाने की पहल
सिरसा, 21 अप्रैल।
केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना शहरी क्षेत्रों में कार्यरत रेहड़ी-फड़ी (स्ट्रीट वेंडर्स) के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना विशेष रूप से छोटे कारोबारियों के लिए शुरू की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य स्ट्रीट वेंडर्स की पहचान सुनिश्चित करना, उन्हें वित्तीय समावेशन के तहत लाना और उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आसान ऋण उपलब्ध करवाना है। इसके तहत लाभार्थियों को तीन चरणों में बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान किया जाता है। पहले चरण में 15 हजार तक का ऋण 12 महीनों के लिए, दूसरे चरण में 25 हजार तक का ऋण 18 महीनों के लिए और तीसरे चरण में 50 हजार तक का ऋण 36 महीनों के लिए दिया जाता है। यदि लाभार्थी समय पर ऋण चुकता करता है, तो वह अगले चरण के अधिक राशि वाले ऋण के लिए पात्र बन जाता है।योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी भी दी जाती है, जो सीधे उनके खाते में तिमाही आधार पर जमा की जाती है। इसके अलावा, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कैशबैक की सुविधा भी दी गई है, जिससे वेंडर्स को प्रति माह और प्रति वर्ष निर्धारित सीमा तक प्रोत्साहन मिलता है। योजना में यूपीआई से जुड़े रूपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी शामिल की गई है, जिसकी प्रारंभिक सीमा 10 हजार रुपये होती है और इसे बढ़ाकर 80 हजार रुपये तक किया जा सकता है।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू ‘स्वनिधि से समृद्धि’ घटक है, जिसके माध्यम से लाभार्थियों के परिवारों को अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाता है, ताकि उनका समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही, ‘सपोर्ट टू अर्बन स्ट्रीट वेंडर्स’ के तहत वेंडर्स की पहचान, प्रमाण पत्र जारी करना और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठाए जाते हैं।
पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार दे रही लाखों की सहायता
सिरसा, 20 अप्रैल।
हरियाणा में बागवानी किसानों को उद्यान विभाग द्वारा फसल तुड़ाई के बाद प्रबंधन (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट) को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना, फसल की उचित रखरखाव करना और उत्पादों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाना है।
योजना के तहत विभिन्न प्रकार की इकाइयों पर लाखों की सहायता दी जाएगी। फार्म गेट पैक हाउस के लिए प्रति इकाई 25 लाख रुपये लागत निर्धारित की गई है, जिस पर किसानों को 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 12.50 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। वहीं, ग्रेडिंग लाइन सहित एकीकृत पैक हाउस पर 160 लाख रुपये की लागत पर 35 प्रतिशत सहायता दी जायेगी, जो अधिकतम प्रति इकाई 56 लाख रुपये, ऋण संबद्ध बैंक एंडेड, इसके अलावा, भंडारण, ग्रेडिंग और पैकिंग इकाइयों पर 320 लाख रुपये की लागत के हिसाब से 35 प्रतिशत (अधिकतम 112 लाख रुपये, ऋण संबद्ध बैंक एंडेड) का प्रावधान है। प्री-कूलिंग यूनिट पर 5 लाख रुपये प्रति मीट्रिक टन लागत के आधार पर 35 प्रतिशत सहायता दी जाएगी, जबकि चलित प्री-कूलिंग यूनिट पर 30 लाख रुपये प्रति इकाई लागत पर 35 प्रतिशत (अधिकतम 10.5 लाख रुपये, ऋण संबद्ध बैंक एंडेड) तय किया गया है।
इसी तरह शीत गृह (कोल्ड स्टोरेज) के लिए भी इस योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं। वहीं, सौर ऊर्जा आधारित शीत गृह को भी योजना में शामिल किया गया है, जिसे अन्य इकाइयों के साथ जोड़ा जा सकता है और इस पर भी 35 प्रतिशत सहायता बैंक ऋण के आधार पर उपलब्ध होगी।
इन योजनाओं से किसानों को फसल के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी, भंडारण क्षमता बढ़ेगी और उन्हें अपने उत्पादों के लिए बेहतर दाम मिल सकेंगे। यह पहल किसानों को आधुनिक कृषि प्रणाली से जोड़ते हुए उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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